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दीपावली की हानियाँ (Diwali Nuksaan)

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दीपावली की हानियाँ   हर साल कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दीपावली यानी कि दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। इस बार 27 अक्टूबर रविवार को देश भर में दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। वैसे दीपावली एक दिन का पर्व नहीं बल्कि पांच दिन तक चलने वाला महापर्व है। दीपावली की हानियाँ (Diwali Nuksaan)  फटाखों के कारण प्रदूषण फैलता हैं।  दीपकों में फिजूल तेल जलता हैं  अत्यधिक मिष्ठान और पकवान से स्वास्थ्य बिगड़ता हैं।  लाइट्स की सजावट के कारण विद्युत् उर्जा की बरबादी होती हैं। Add caption  फिजूल पानी बहाया जाता हैं।  दिखावा के चक्कर में लोग फिजूल खर्च करते है। जहाँ लाभ होते हैं वही हानियाँ भी होती हैं । दीपावली एक बड़ा त्यौहार हैं जो अपने साथ अपार ख़ुशी और प्रेम लेकर आता हैं पर सावधानी और विचार के साथ इसे मनाये तो यह हानि नहीं देता अपितु खुशहाली देता हैं। नोट-: ऐसा दिन कब आएगा जब हम रोज दीवाली मनाएंगे ओर हमारे पास किसी प्रकार का कोई दुख नही होगा। हा ये संभव है आज संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति करके हम रोज दिवाली मना सकते। क्योंकि संत रामपाल जी महाराज हमे सही भक्ति बताते...

बॉलीवुड एक अभिशाप

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बॉलीवुड एक अभी शाप बॉलीवुड की बात की जाये तो आज अगर देश मे ज्यादा तर देश तो बिगड़ने ओर देश की जो युवा पीढ़ी है उनको गर्ग में डालने में इनका मत्वपूर्ण हाथ है। आज की फिल्मों को हम अपने परिवार के साथ नही देख सकते उसमे इतनी अश्लीलता दिखाई जाती है कि कोई अपने माँ बाप के साथ देख नही सकता। अगर फिल्मों में देश के बारे में, प्रकृति के बारे, अपनी संस्कृति के बारे में बताया जाये तो हमारा देश बहुत प्रगति करेगा । लेकिन ऐसा कुछ भी नही दिखाया जाता।  आज देश विदेश में संत रामपाल जी महाराज के मंगलम प्रवचन चलते हैं जिनको लोग बड़े ध्यान से देखते है। अगर फिल्मो ओर टीवी चैनल में संत रामपाल जी महाराज का वीडियो चले ना। आज हमारे देश मे सभी प्रकार की कुप्रथा खत्म हो जाएगी और देश नाश मुक्त हो जायेगा। Like Share Comments

मोबाइल फ़ोन के फायदे ओर नुकसान

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मोबाइल फ़ोन के फायदे ओर नुकसान अगर आप किसी से मोबाइल फोन से होने वाले फायदों के बारे में पूछेंगे तो वो शायद ढेरों फायदे आपको गिना देगा लेकिन इससे होने वाले नुकसान के बारे में कुछ ही लोग बता पाएंगे। मोबाइल फोन आज हर वर्ग की जरूरत बन चुका है फिर वो चाहे साइकिल से चलने वाला एक आम आदमी हो या फिर महंगी कार से चलने वाला कोई बिजनेसमैन। ऐसे में हमें मोबाइल फोन से जहां ढेरों फायदे होते हैं वैसे ही कई नुकसान भी है। इसके अलावा ये उस व्‍यक्ति के प्रयोग पर भी निर्भर करता है कि उसके लिए फोन सिर्फ कॉल करने का एक साधन है या फिर उससे ज्‍यादा। फोन के जरिए आप कभी भी किसी से संपर्क कर सकते हैं फिर वो शख्‍स दुनियां में कहीं भी क्‍यों न हो। भले ही ये बात आपको साधारण लग रही हो लेकिन जरा सोचिए 10 साल पहले कोई ये सोच सकता था। फोन में ढेर सारा डेटा आप अपने साथ लेकर चल सकते हैं जैसे फोटो, ईबुक, गाने, वीडियो इसके लिए आपको ढेरों किताबें और एमपी 3 प्‍लेयर की अलग से जरूरत नहीं पड़ती। अगर आपके पास एक अच्‍छा कैमरा फोन है तो कभी भी फोटो और वीडियों रिकार्ड कर सकते हैं यानी आपको अ...

पर्यावरण के फायदे

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पर्यावरण के फायदे ओर अभिशाप पर्यावरण को जितना साफ रखेंगे उतना अच्छा होगा पर्यावरण और हमारा शरीर एक जैसा है अगर हम शरीर को स्वछ ओर साफ नही रखेंगे तो बीमार पड़ जाएंगे । और अगर पर्यावरण को साफ नही रखेंगे तो इस पर्यावरण में अनेक बीमारियों उत्पन हो जायेगी। Like Share Comment

Guru ki mahima

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गुरु को महिमा गुरु बड़े गोविंद से मन मे देख विचार । हरि सुमरे सो पार है गुरु सुमरे होये अपार।। अगर आप को मोक्ष प्राप्त करना है तो पहले गुरु बनाना पड़ेगा क्योंकि गुरु बिना मोक्ष नही। गुरु बिन माला फेरते गुरु बिन देते दान। गुरु बिन दोनों निष्फल है चाहे पूछो वेद पुराण।। गुरु की महिमा के बारे में ओर ज्यादा जानना है तो आप संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन सुनिये। Like  Share Comments

भैंसे से वेद मंत्र किसने बुलवाये थे ?

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भैंसे से वेद मंत्र बुलवाना कबीर साहेब जी एक लीला स्वरूप स्वामी रामानन्द जी को गुरु बनाये ताकि गुरु पद्दति बनी रहे। कबीर साहेब जी ने स्वामी रामानन्द जी को तत्वज्ञान कगया जिससे रामानन्द जी जान गए थे कि कबीर साहेब स्वयं परमेश्वर हैं। वे कबीर साहेब जी द्वारा बताए मन्त्र जाप करते थे लेकिन लोगों की नजरों में कबीर परमात्मा जी के गुरू कहलाये। स्वामी रामानन्द जी जहाँ भी किसी सत्संग-समागम में जाते थे तो कबीर जी को साथ लेकर जाते थे। एक समय एक तोताद्री नामक स्थान पर सत्संग था। दूर-दूर के ब्राह्मण, पण्डित लोग वहाँ पधारे। स्वामी रामानन्द जी भी परमेश्वर कबीर जी के साथ उस सत्संग में शामिल हुए। उस समागम में एक महामंडलेश्वर आया हुआ था। वह  सत्संग कर रहा था व प्रसंग चल रहा था कि रामचंद्र जी ने भीलनी के झूठे बेर खाये। इसी तरह साधु सन्तो को भी सहनशील स्वभाव का होना चाहिए। सत्संग के पश्चात् भोजन-भण्डारा शुरू हुआ। मुख्य पाण्डे को पता चला कि स्वामी रामानन्द जी के साथ कबीर आया हुआ है वह जुलाहा जाति से है। वह रामानन्द के साथ ब्राह्मणों वाले पांडाल  में भोजन करने के लिए साथ आएगा, यदि मना करेंग...

कटा हुआ सिर कैसे जोड़ा।

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कबीर साहेब का चमत्कार  कटा हुआ सिर कैसे जोड़ा। एक समय कबीर साहेब अपने भक्त सम्मन के यहाँ अचानक दो सेवकों (कमाल व शेखफरीद) के साथ पहुँच गए। सम्मन के घर कुल तीन प्राणी थे। सम्मन, सम्मन की पत्नी नेकी और सम्मन का पुत्र सेऊ (शिव)। भक्त सम्मन इतना गरीब था कि कई बार अन्न भी घर पर नहीं होता था, सारा परिवार भूखा सो जाता था और आज वही दिन था। भक्त सम्मन ने अपने गुरुदेव कबीर साहेब से पूछा कि साहेब खाने का विचार बताएँ, खाना कब खाओगे? कबीर साहेब ने कहा कि भाई भूख लगी है, भोजन बनाओ। सम्मन अन्दर घर में जा कर अपनी पत्नी नेकी से बोला कि अपने घर अपने गुरुदेव भगवान आये है, उनके लिए भोजन बनाओ। तभी नेकी ने कहा घर मे कुछ नही है बनाने के लिये, तब उसने सोचा पड़ोस से मांग लू , लेकिन सबने कहा कि "तुम्हारे घर तुम कहते हो भगवान  आये है कबीर जी, तो अब हमारे घर क्यों आये हो"? तभी सम्मन ने कहा एक सेठ है उसकी खिड़की से आटा चोरी करके ले आए। सेउ को भेजा खिड़की से आटा लेने के लिये, तब जैसे ही सेउ अंदर गया, सेठ उठ गया और सेउ ने आटा बाहर अपने पिता सम्मन को दे दिया वो घर आया , नेकी ने पूछा कहाँ है सेउ? तो ...