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Showing posts from June, 2020

Guru ki mahima

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गुरु को महिमा गुरु बड़े गोविंद से मन मे देख विचार । हरि सुमरे सो पार है गुरु सुमरे होये अपार।। अगर आप को मोक्ष प्राप्त करना है तो पहले गुरु बनाना पड़ेगा क्योंकि गुरु बिना मोक्ष नही। गुरु बिन माला फेरते गुरु बिन देते दान। गुरु बिन दोनों निष्फल है चाहे पूछो वेद पुराण।। गुरु की महिमा के बारे में ओर ज्यादा जानना है तो आप संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन सुनिये। Like  Share Comments

भैंसे से वेद मंत्र किसने बुलवाये थे ?

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भैंसे से वेद मंत्र बुलवाना कबीर साहेब जी एक लीला स्वरूप स्वामी रामानन्द जी को गुरु बनाये ताकि गुरु पद्दति बनी रहे। कबीर साहेब जी ने स्वामी रामानन्द जी को तत्वज्ञान कगया जिससे रामानन्द जी जान गए थे कि कबीर साहेब स्वयं परमेश्वर हैं। वे कबीर साहेब जी द्वारा बताए मन्त्र जाप करते थे लेकिन लोगों की नजरों में कबीर परमात्मा जी के गुरू कहलाये। स्वामी रामानन्द जी जहाँ भी किसी सत्संग-समागम में जाते थे तो कबीर जी को साथ लेकर जाते थे। एक समय एक तोताद्री नामक स्थान पर सत्संग था। दूर-दूर के ब्राह्मण, पण्डित लोग वहाँ पधारे। स्वामी रामानन्द जी भी परमेश्वर कबीर जी के साथ उस सत्संग में शामिल हुए। उस समागम में एक महामंडलेश्वर आया हुआ था। वह  सत्संग कर रहा था व प्रसंग चल रहा था कि रामचंद्र जी ने भीलनी के झूठे बेर खाये। इसी तरह साधु सन्तो को भी सहनशील स्वभाव का होना चाहिए। सत्संग के पश्चात् भोजन-भण्डारा शुरू हुआ। मुख्य पाण्डे को पता चला कि स्वामी रामानन्द जी के साथ कबीर आया हुआ है वह जुलाहा जाति से है। वह रामानन्द के साथ ब्राह्मणों वाले पांडाल  में भोजन करने के लिए साथ आएगा, यदि मना करेंग...

कटा हुआ सिर कैसे जोड़ा।

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कबीर साहेब का चमत्कार  कटा हुआ सिर कैसे जोड़ा। एक समय कबीर साहेब अपने भक्त सम्मन के यहाँ अचानक दो सेवकों (कमाल व शेखफरीद) के साथ पहुँच गए। सम्मन के घर कुल तीन प्राणी थे। सम्मन, सम्मन की पत्नी नेकी और सम्मन का पुत्र सेऊ (शिव)। भक्त सम्मन इतना गरीब था कि कई बार अन्न भी घर पर नहीं होता था, सारा परिवार भूखा सो जाता था और आज वही दिन था। भक्त सम्मन ने अपने गुरुदेव कबीर साहेब से पूछा कि साहेब खाने का विचार बताएँ, खाना कब खाओगे? कबीर साहेब ने कहा कि भाई भूख लगी है, भोजन बनाओ। सम्मन अन्दर घर में जा कर अपनी पत्नी नेकी से बोला कि अपने घर अपने गुरुदेव भगवान आये है, उनके लिए भोजन बनाओ। तभी नेकी ने कहा घर मे कुछ नही है बनाने के लिये, तब उसने सोचा पड़ोस से मांग लू , लेकिन सबने कहा कि "तुम्हारे घर तुम कहते हो भगवान  आये है कबीर जी, तो अब हमारे घर क्यों आये हो"? तभी सम्मन ने कहा एक सेठ है उसकी खिड़की से आटा चोरी करके ले आए। सेउ को भेजा खिड़की से आटा लेने के लिये, तब जैसे ही सेउ अंदर गया, सेठ उठ गया और सेउ ने आटा बाहर अपने पिता सम्मन को दे दिया वो घर आया , नेकी ने पूछा कहाँ है सेउ? तो ...

कबीर दास जी का परिचय

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कबीर दास जी का परिचय  जब भी भारत में धर्म, भाषा, संस्कृति की चर्चा होती है तो कबीर दास जी का नाम का जिक्र सबसे पहले होता है क्योंकि कबीर दास जी ने अपने दोहों के माध्यम से जाने पहचाने जाते है। इसके साथ ही उन्होनें जीवन के कई ऐसे उपदेश दिए हैं जिन्हें अपनाकर दर्शवादी बन सकते हैं इसके साथ ही कबीर दास ने अपने दोहों से समाज में फैली कुरोतियों को दूर करने की कोशिश की है और भेदभाव को मिटाया है। कबीर पंथ के लोग को कबीर पंथी कहे जाते है जो पूरे उत्तर और मध्य भारत में फैले हुए है। संत कबीर के लिखे कुछ महान रचनाओं में बीजक, कबीर ग्रंथावली, अनुराग सागर, सखी ग्रंथ आदि है। कबीर दास जी का जीवन परिचय – उनका का जन्म वर्ष 1440 में और मृत्यु वर्ष 1518 में हुई थी। इनकी माता पिता का नाम नीरू-नीम थे। इनका लहरतारा तालाब में सुबह स्नान करते वक्त कमल के पुष्प पर मिले थे। इसलिए इनकी जयंती नही प्रकट दिवस मनाया जाता है। 5 जून 2020 को इनका प्रकट दिवस है। Like share Comments