कटा हुआ सिर कैसे जोड़ा।

कबीर साहेब का चमत्कार 
कटा हुआ सिर कैसे जोड़ा।

एक समय कबीर साहेब अपने भक्त सम्मन के यहाँ अचानक दो सेवकों (कमाल व शेखफरीद) के साथ पहुँच गए। सम्मन के घर कुल तीन प्राणी थे। सम्मन, सम्मन की पत्नी नेकी और सम्मन का पुत्र सेऊ (शिव)। भक्त सम्मन इतना गरीब था कि कई बार अन्न भी घर पर नहीं होता था, सारा परिवार भूखा सो जाता था और आज वही दिन था। भक्त सम्मन ने अपने गुरुदेव कबीर साहेब से पूछा कि साहेब खाने का विचार बताएँ, खाना कब खाओगे? कबीर साहेब ने कहा कि भाई भूख लगी है, भोजन बनाओ। सम्मन अन्दर घर में जा कर अपनी पत्नी नेकी से बोला कि अपने घर अपने गुरुदेव भगवान आये है, उनके लिए भोजन बनाओ। तभी नेकी ने कहा घर मे कुछ नही है बनाने के लिये, तब उसने सोचा पड़ोस से मांग लू , लेकिन सबने कहा कि "तुम्हारे घर तुम कहते हो भगवान  आये है कबीर जी, तो अब हमारे घर क्यों आये हो"? तभी सम्मन ने कहा एक सेठ है उसकी खिड़की से आटा चोरी करके ले आए।


सेउ को भेजा खिड़की से आटा लेने के लिये, तब जैसे ही सेउ अंदर गया, सेठ उठ गया और सेउ ने आटा बाहर अपने पिता सम्मन को दे दिया वो घर आया , नेकी ने पूछा कहाँ है सेउ? तो सम्मन ने कहा सेठ ने पकड़ लिया, तब नेकी ने कहा- उसकी गर्दन काट लाओ अगर उसका चेहरा किसी ने देखा तो हमारे भगवान में दोष निकालेंगे, की यह कबीर जी के शिष्य है, फिर सम्मन सेउ की गर्दन काट लाता है और फिर नेकी खाना बनाती है, तब तीन थाली में खाना अलग अलग रखती है। कबीर जी के साथ दो शिष्य भी थे, तब कबीर जी ने कहा की छः थालियों में भंडरा लगाओ, नेकी 6 थालियों मे भोजन लगा देती है। लेकिन मन में सोचती है सेउ तो मर गया है, लेकिन कबीर साहेब तो अंतर्यामी है, उन्होंने कहा "शीश तो चोरों के कटते है भगतों के नही", तभी सेउ के शीश लग जाता है और कही खरोच तक नही थी।



जो चावे सो करदे सतगुरु, भ्रम पड़ो मत कोई।
सेउ धड़ पर शीश चढ़ाया, पीछे करी रसोई।।

Like
Share
Comments

Comments

Popular posts from this blog

भैंसे से वेद मंत्र किसने बुलवाये थे ?

पर्यावरण के फायदे

मोबाइल फ़ोन के फायदे ओर नुकसान