पर्यावरण की हानि किस कारण ?



पर्यावरण की हानि किस कारण ?

विज्ञान के कारण हुए प्रदूषणसे विश्व पर्यावरण धोखे में ।
आज विज्ञान मनुष्य के लिए लाभ दायक है तो हानिकारक भी है, अगर प्रकृति पर मानव अत्याचार करेगा तो प्रकृति भी उसका बदला लेगी ।

 उर्जा का अभाव अनावृष्टि अकाल, प्राकृतिक आपदा ,  वांशिक संघर्ष, नैतिक अध पतन, भीषण रोगों का प्रादुर्भाव तथा अंत में महायुद्ध । वर्षा कैसे होगी ? मेघ अंतरिक्ष में जमा होकर बरसतें हैं वह केवल वृक्षों के लिए । डॉलर्स पर प्रेम करने वाले निकृष्ट मनुष्य के लिए कैसे और क्यों मेघ बरसेंगे ?..
मनुष्य के अति स्वार्थ के कारण
भगवान ने सुरक्षा दी हुई पृथ्वी को भी धोखा पहुंचना ।


मनुष्य के बढते पापों के कारण भी प्रदूषण की समस्या।
यह सब आज आधुनिकता के प्रभाव से हो रहा है । आज प्रत्येक मनुष्य में विषय वासनाओं के अत्याधिक प्रभाव के कारण तथा सत्य के ज्ञान का अभाव होने से मानव जीवन में अनावश्यक विकृतियां जन्म ले रही हैं, उन्हें ही पाप कहते है। आज यह पाप इतना बढ गया है, कि इस विकृति के कारण स्वयं मानव ने अपना शरीर दूषित कर लिया है ।

बाहर के वातावरण में मनुष्य के विचारों के कारण निर्माण हुए परिपाक से सर्वत्र की हवा तथा पानी दूषित हो गया है, इसीलिए आज प्रमुखता से प्रदूषण की समस्या सभी को डरा रही है । यह सब हमारी विकृति के कारण ही हुआ है । मनुष्य को जीने के लिए शुद्ध हवा, शुद्ध पानी, सात्त्विक आहार, स्थलकाल तथा वातावरण के अनुसार वेशभूषा और घर की आवश्यकता है। परंतु उसे यह ध्यान में नहीं आता कि स्वयं के सुख की विकृत समझने के कारण ही हम अपना नाश कर रहे हैं । इसलिए अपना रहन-सहन निसर्ग नियम के अनुसार रखना चाहिए । हमने अपने ही अज्ञान के कारण स्वयं के लिए समस्याएं निर्माण कर ली हैं । आज प्रदूषण तथा ऊर्जा संकट के प्रश्न कितने भीषण हो गए है । अब हमें इन बातों की  जड (मूल) क्या है, यह ढूंढकर उसके अनुसार आचरण करना चाहिए ।

नोट:- 
अगर हमें हमारा जीवन व अपनी प्रकृति सुरक्षित रखनी है तो हमे संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेनी होगी तभी हमें सुख समृधि मिलेगी। और हमारा कल्याण होगा।


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